मुख्यं गम्यताम्

उदाहरणानि

शीघ्र मार्गाः

पूर्ण पृष्ठसूची

अष्टलक्ष्मीस्तोत्रम्

Also spelled: Ashtalakshmistotram · Ashtalakshmisthothram

3

परम्परा

आदिलक्ष्मी

सुमनसवन्दित सुन्दरि माधवि

चन्द्र सहोदरि हेममये ।

मुनिगणमण्डित मोक्षप्रदायिनि

मञ्जुळभाषिणि वेदनुते ॥

पङ्कजवासिनि देवसुपूजित

सद्गुणवर्षिणि शान्तियुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

आदिलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥

॥१॥

धान्यलक्ष्मी

अहिकलि कल्मषनाशिनि कामिनि

वैदिकरूपिणि वेदमये ।

क्षीरसमुद्भव मङ्गलरूपिणि

मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ॥

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि

देवगणाश्रित पादयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

धान्यलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥

॥२॥

धैर्यलक्ष्मी

जयवरवर्णिनि वैष्णवि भार्गवि

मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये ।

सुरगणपूजित शीघ्रफलप्रद

ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ॥

भवभयहारिणि पापविमोचनि

साधुजनाश्रित पादयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

धैर्यलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥

॥३॥

गजलक्ष्मी

जयजय दुर्गतिनाशिनि कामिनि

सर्वफलप्रद शास्त्रमये ।

रथगज तुरगपदादि समावृत

परिजनमण्डित लोकनुते ॥

हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित

तापनिवारिणि पादयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

गजलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥

॥४॥

सन्तानलक्ष्मी

अहिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि

रागविवर्धिनि ज्ञानमये ।

गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि

स्वरसप्त भूषित गाननुते ॥

सकल सुरासुर देवमुनीश्वर

मानववन्दित पादयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

सन्तानलक्ष्मि त्वं पालय माम् ॥

॥५॥

विजयलक्ष्मी

जय कमलासनि सद्गतिदायिनि

ज्ञानविकासिनि गानमये ।

अनुदिनमर्चित कुङ्कुमधूसर-

भूषित वासित वाद्यनुते ॥

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित

शङ्कर देशिक मान्य पदे ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

विजयलक्ष्मि सदा पालय माम् ॥

॥६॥

विद्यालक्ष्मी

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि

शोकविनाशिनि रत्नमये ।

मणिमयभूषित कर्णविभूषण

शान्तिसमावृत हास्यमुखे ॥

नवनिधिदायिनि कलिमलहारिणि

कामित फलप्रद हस्तयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ॥

॥७॥

धनलक्ष्मी

धिमिधिमि धिंधिमि धिंधिमि धिंधिमि

दुन्दुभि नाद सुपूर्णमये ।

घुमघुम घुंघुम घुंघुम घुंघुम

शङ्खनिनाद सुवाद्यनुते ॥

वेदपुराणेतिहास सुपूजित

वैदिकमार्ग प्रदर्शयुते ।

जयजय हे मधुसूदन कामिनि

धनलक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥

॥८॥