नवरात्रे द्विवर्षादारभ्य दशवर्षपर्यन्तं कन्यकाः पूज्याः। प्रथमदिने द्विहायनी कौमारी, द्वितीये त्रिहायनी त्रिपुरा इत्येवं नवमदिने दशहायनी सुभद्रा। एकस्यां कन्यायां सामान्यपूजा, दिनविशेषे ध्यानं नामार्चनं समर्पणं च भिद्यन्ते। एकस्मिन्नेव दिने नव कन्याः पूज्याश्चेत् दक्षिणादुत्तरं प्राङ्मुखीः उपवेश्य कौमार्यादि सुभद्रान्तं पूजयेत्।
पूर्वाङ्गपूजा. इदं पूर्वाङ्गं सर्वासु पूजासु समानम् — आदौ आचर्य पश्चात् प्रधानपूजां कुर्यात्। पूर्वाङ्गपूजा
पूर्वाङ्गपूजा
संवृणु
आचमनम्
ध्यानम्
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
प्राणायामः — सङ्कल्पः
अप उपस्पृश्य
ममोपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं करिष्यमाणस्य कर्मणः निर्विघ्नेन परिसमाप्त्यर्थं आदौ विघ्नेश्वरपूजां करिष्ये।
महद्भन्दनम्
आब्रह्मलोकादारोहात् आलोकात् लोकपर्वतात्।
ये वसन्ति द्विजा देवास्तेभ्यो नित्यं नमो नमः ॥
आसनपूजा
पृथिव्या मेरुपृष्ठ ऋषिः। सुतलं छन्दः। कूर्मो देवता। आसने विनियोगः।
पृथिवि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं चासनं कुरु ॥
घण्टापूजा
घण्टानादं कृत्वा।
आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं तु रक्षसाम्।
घण्टारवं करोम्यादौ देवताह्वानकारणम् ॥
विघ्नेश्वरपूजा
अस्मिन् हरिद्राबिम्बे श्रीविघ्नेश्वरं ध्यायामि।
आवाहयामि। आसनं समर्पयामि। पादयोः पाद्यं समर्पयामि। अर्घ्यं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि। मधुपर्कं समर्पयामि। स्नानं समर्पयामि। आचमनीयं समर्पयामि। वस्त्रं समर्पयामि। उपवीतं समर्पयामि। दिव्यपरिमलगन्धान् धारयामि। अक्षतान् समर्पयामि। पुष्पैः पूजयामि।
| सुमुखाय नमः |
| एकदन्ताय नमः |
| कपिलाय नमः |
| गजकर्णिकाय नमः |
| लम्बोदराय नमः |
| विकटाय नमः |
| विघ्नराजाय नमः |
| विनायकाय नमः |
| धूमकेतवे नमः |
| गणाध्यक्षाय नमः |
| फालचन्द्राय नमः |
| गजाननाय नमः |
| वक्रतुण्डाय नमः |
| शूर्पकर्णाय नमः |
| हेरम्बाय नमः |
| स्कन्दपूर्वजाय नमः |
| सिद्धिविनायकाय नमः |
| श्रीमहागणपतये नमः |
उपचाराः
धूपमाघ्रापयामि। दीपं दर्शयामि। निवेदयामि। कर्पूरनीराजनं दर्शयामि। समस्तोपचारपूजां समर्पयामि।
प्रार्थना
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
इति प्रार्थ्य। प्राणायामः।
सङ्कल्पः
शुभे शोभने मुहूर्ते आद्यब्रह्मणः द्वितीयपराधे श्वेतवराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे प्रथमे पादे जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे मेरोर्दक्षिणे पार्श्वे शकाब्दे अस्मिन् वर्तमाने व्यावहारिके प्रभवादिषष्टिसंवत्सराणां मध्ये …… नाम संवत्सरे …… अयने …… ऋतौ …… मासे …… पक्षे …… शुभतिथौ …… वासरयुक्तायां …… नक्षत्रयुक्तायां शुभयोगशुभकरणसकलविशेषणविशिष्टायामस्यां शुभतिथौ ममोपात्तसमस्तदुरितक्षयद्वारा श्रीपरमेश्वरप्रीत्यर्थं शरन्नवरात्रमहोत्सवाङ्गतया कन्यापूजां करिष्ये।
अप उपस्पृश्य। श्रीविघ्नेश्वराय नमः यथास्थानं प्रतिष्ठापयामि। शोभनार्थे क्षेमाय पुनरागमनाय च। इति विघ्नेश्वरमुद्राम्।
कलशपूजा
कलशं गन्धपुष्पाक्षतैरभ्यर्च्य। कलशजलेन तत्तद्देवतानाम योजयेत्। पूजाद्रव्याणि आत्मानं च प्रोक्ष्य।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
| गङ्गायै नमः | |
| यमुनायै नमः | |
| गोदावर्यै नमः | |
| सरस्वत्यै नमः | |
| नर्मदायै नमः | |
| सिन्धवे नमः | |
| कावेर्यै नमः | पुष्पैः पूजयामि। |
शङ्खपूजा
कलशोदकेन शङ्खं पूरयेत्। शङ्खजलेन पूजोपकरणानि द्रव्याणि आत्मानं च त्रिः प्रोक्ष्य, पुनः शङ्खं पूरयेत्।
त्वं पुरा सागरोत्पन्नो विष्णुना विधृतः करे।
देवैश्च पूजितः सर्वैः पाञ्चजन्य नमोऽस्तु ते ॥
आत्मपूजा
देहो देवालयः प्रोक्तो जीवो देवः सनातनः।
त्यजाम्यज्ञाननिर्मूल्यं सोऽहंभावेन पूजये ॥
पीठपूजा
| ओं सकलगुणात्मशक्तियुक्ताय योगपीठाय नमः |
| आधारशक्त्यै नमः |
| मूलप्रकृत्यै नमः |
| आदिवराहाय नमः |
| आदिकूर्माय नमः |
| अनन्ताय नमः |
| पृथिव्यै नमः |
| आदित्यादिनवग्रहदेवताभ्यो नमः |
| दशदिक्पालेभ्यो नमः |
गुरुध्यानम्
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुर्गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
श्रीगुरुं ध्यायामि।
प्रधानपूजा
ध्यानम्
शुक्लाम्बरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये ॥
ध्यानम् आवाहनम्
मन्त्राक्षरमयीं देवीं मातॄणां रूपधारिणीम्।
नवदुर्गात्मिकां साक्षात्कन्यामावाहयाम्यहम्॥
कलशादिपूजां कृत्वा कन्यां आसने उपवेश्य। दुर्गालक्ष्मीसरस्वतीस्वरूपां श्रीमहात्रिपुरसुन्दरीं ध्यायामि। आवाहयामि॥
आसनम्
वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।
स्वर्णसिंहासनं दुर्गे आसनं ते ददाम्यहम्॥
देव्यै नमः। आसनं समर्पयामि॥
पाद्यम्
गन्धपुष्पाक्षतैर्युक्तं शीतलं निर्मलं जलम्।
पाद्यार्थं शुद्धमानीतं पाद्यं ते प्रददाम्यहम्॥
देव्यै नमः। पाद्यं समर्पयामि॥
अर्घ्यम्
अर्घ्यं च फलसंयुक्तं सर्वसौभाग्यदायिनि।
गृहाण देवि वरदे दुर्गा देव्यै नमोऽस्तु ते॥
देव्यै नमः। अर्घ्यं समर्पयामि॥
आचमनम्
गङ्गातोयं समानीतं सुवर्णकलशे स्थितम्।
आचम्यतां महाभागे दुर्गे दुर्गार्तिनाशिनि॥
देव्यै नमः। आचमनं समर्पयामि॥
स्नानम्
गङ्गासरस्वतीरेवाकावेरीयमुनाजलैः।
स्नापितासि मया देवि तथा शान्तिं कुरुष्व मे॥
देव्यै नमः। स्नापयामि॥ आचमनीयं समर्पयामि॥
वस्त्रम्
सर्वभूताधिपे सौम्ये लोकलज्जानिवारिणि।
वाससी प्रतिगृह्येतां मया तुभ्यं समर्पिते॥
देव्यै नमः। वस्त्रयुग्मं समर्पयामि॥ आचमनीयं समर्पयामि॥
भूषणम्
किरीटहारकेयूरकुण्डलाङ्गदकङ्कणैः।
हंसकैर्मेखलाद्यैश्च भूषये त्वां कुमारिके॥
देव्यै नमः। भूषणं समर्पयामि॥
सौभाग्यद्रव्यम्
ताटङ्कं कण्ठसूत्रं च सिन्दूरं कज्जलादिकम्।
सौमङ्गल्यप्रदे देवि गृहाण करुणानिधे॥
देव्यै नमः। सौभाग्यद्रव्यं समर्पयामि॥
गन्धः
चन्दनागरुकस्तूरीहिमवालुककेसरैः।
गन्धं दास्यामि वरदे कौमारि प्रतिगृह्यताम्॥
देव्यै नमः। गन्धान् धारयामि॥ हरिद्राचूर्णं समर्पयामि। अलक्तकं समर्पयामि। हरिद्राकुङ्कुमं समर्पयामि॥
पुष्पमाला
नानाविधानि दिव्यानि नानावर्णयुतानि च।
पुष्पाणि ते प्रयच्छामि भक्त्या देवि वरप्रदे॥
देव्यै नमः। पुष्पमालां समर्पयामि॥
अङ्गपूजा
| कौमार्यै नमः | पादौ पूजयामि॥ |
| कल्याण्यै नमः | गुल्फौ पूजयामि॥ |
| कन्यकायै नमः | ऊरू पूजयामि॥ |
| भद्रायै नमः | कटिं पूजयामि॥ |
| रोहिण्यै नमः | उदरं पूजयामि॥ |
| विश्वायै नमः | नाभिं पूजयामि॥ |
| सुभद्रायै नमः | हृदयं पूजयामि॥ |
| सुमङ्गलायै नमः | कण्ठं पूजयामि॥ |
| कारुण्यमूर्तये नमः | नेत्रे पूजयामि॥ |
| सुललाटायै नमः | ललाटं पूजयामि॥ |
| माङ्गल्यै नमः | कर्णौ पूजयामि॥ |
| महेश्वर्यै नमः | शिरः पूजयामि॥ |
| नवदुर्गात्मिकायै नमः | सर्वाण्यङ्गानि पूजयामि॥ |
नामार्चनम्
अङ्गपूजानन्तरं दिनविशेषोक्तैः नवभिः नामभिः अर्चनम्, ततः अष्टोत्तरशतनामभिः अर्चनम्।
धूपः
कालागरुसमुद्भूतः देवद्रुमरसान्वितः।
आघ्रायतामयं धूपः भवानि घ्राणतर्पणः॥
देव्यै नमः। धूपं समर्पयामि।
दीपः
साज्यं त्रिवर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
गृहाण मङ्गलं दीपं त्रैलोक्यतिमिरापहम्॥
देव्यै नमः। दीपं समर्पयामि।
नैवेद्यम्
अन्नं चतुर्विधं स्वादु रसैः षड्भिः समन्वितम्।
नैवेद्यं गृह्यतां देवि भक्तिं मे ह्यचलां कुरु॥
नानाविधानि दिव्यानि नानापक्वफलानि च।
भुज्यतां कनके दुर्गे सुस्वादु मधुराणि च॥
देव्यै नमः। महानैवेद्यं फलानि च निवेदयामि।
ताम्बूलम्
पूगीफलसमायुक्तं नागवल्लीदलैर्युतम्।
कर्पूरचूर्णसंयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यताम्॥
देव्यै नमः। ताम्बूलं समर्पयामि। देव्यै नमः। कर्पूरनीराजनं समर्पयामि।
पुष्पाञ्जलिः
मन्दारपारिजातादि पाटलीकेतकानि च।
जातीचम्पकपुष्पाणि गृहाणेमानि शोभने॥
पुष्पाञ्जलिं समर्पयामि॥
प्रदक्षिणनमस्काराः
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
प्रदक्षिणनमस्कारान् समर्पयामि।
प्रार्थना
अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति (दासीयमिति) मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि।
यत्पूजितं मया देवि परिपूर्णं तदस्तु ते॥
अज्ञानाद्विस्मृतेर्भ्रान्त्या यन्न्यूनमधिकं कृतम्।
तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसीद परमेश्वरि॥
समर्पणम्
दुर्गासप्तश्लोकीं दुर्गापञ्चरत्नस्तुतिं च पठेत्।
यस्याः स्मृत्या च नामोक्त्या तपोयज्ञक्रियादिषु।
न्यूनं संपूर्णतां याति सद्यो वन्दे परां शिवाम्॥
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवे कृतेन कन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका महात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
ओं तत्सत् ब्रह्मार्पणमस्तु॥
१. कौमारी — प्रथमदिनम्
आसनाद्युपचाराः कन्यापूजावत्। अङ्गपूजानन्तरं अष्टोत्तरशतनामार्चनात् पूर्वं विशेषनामार्चनम्।
शरन्नवरात्रमहोत्सवाङ्गतया प्रथमे दिने कौमारीसंज्ञकद्विहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरूपिणि।
पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोऽस्तु ते॥
कौमारीं ध्यायामि। आवाहयामि॥
| कौमार्यै नमः। |
| कालरूपिण्यै नमः। |
| चन्द्रमुख्यै नमः। |
| भद्ररूपिण्यै नमः। |
| पुष्पप्रियायै नमः। |
| अट्टहासिन्यै नमः। |
| रुद्राण्यै नमः। |
| चन्द्रवदनायै नमः। |
| महोज्ज्वलायै नमः। |
समर्पणम् — कौमारी
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन प्रथमदिनप्रयुक्तकौमारीसंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
२. त्रिपुरा — द्वितीयदिनम्
आसनादि कन्यापूजावत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
द्वितीये दिने त्रिपुरासंज्ञकत्रिहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
त्रिपुरां त्रिपुराधारां ज्ञानमार्गस्वरूपिणीम्।
त्रैलोक्यवन्दितां देवीं त्रिपुरां पूजयाम्यहम्॥
त्रिपुरां ध्यायामि। आवाहयामि॥
| भगमालिन्यै नमः। |
| जन्मरहितायै नमः। |
| सिंहवाहिन्यै नमः। |
| जगद्धात्र्यै नमः। |
| महाज्वालायै नमः। |
| यशोवत्यै नमः। |
| जनप्रियायै नमः। |
| महादेव्यै नमः। |
| त्रिमूर्त्यै नमः। |
समर्पणम् — त्रिपुरा
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन द्वितीयदिनप्रयुक्तत्रिपुरासंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
३. कल्याणी — तृतीयदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
तृतीये दिने कल्याणीसंज्ञकचतुर्हायनकन्यापूजां करिष्ये॥
कालिकां तु कलातीतां कारुण्यैकपरां शिवाम्।
कल्याणजननीं देवीं कल्याणीं पूजयाम्यहम्॥
कल्याणीं ध्यायामि। आवाहयामि॥
| कमलाक्ष्यै नमः। |
| शस्त्रधारिण्यै नमः। |
| कलावत्यै नमः। |
| घोररूपिण्यै नमः। |
| बलिप्रियायै नमः। |
| कल्याण्यै नमः। |
| चामुण्डायै नमः। |
| शत्रुतापिन्यै नमः। |
| चण्डमुण्डनिषूदिन्यै नमः। |
समर्पणम् — कल्याणी
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन तृतीयदिनप्रयुक्तकल्याणीसंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
४. रोहिणी — चतुर्थदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
चतुर्थे दिने रोहिणीसंज्ञकपञ्चहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
अणिमादिगुणोदारां अकाराद्यक्षरात्मिकाम्।
अनन्तशक्तिसहितां रोहिणीं पूजयाम्यहम्॥
रोहिणीं ध्यायामि। आवाहयामि॥
| ब्रह्माण्यै नमः। |
| पापनाशिन्यै नमः। |
| रोहिण्यै नमः। |
| ब्रह्मजनन्यै नमः। |
| शतचण्ड्यै नमः। |
| चण्डविक्रमायै नमः। |
| कौशिक्यै नमः। |
| कालरात्र्यै नमः। |
| पानरतायै नमः। |
समर्पणम् — रोहिणी
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन चतुर्थदिनप्रयुक्तरोहिणीसंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
५. कालिका — पञ्चमदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
पञ्चमे दिने कालिकासंज्ञकषड्हायनकन्यापूजां करिष्ये॥
कामचारीं कालरात्रीं कालदण्डस्वरूपिणीम्।
कामदां करुणोदारां कालिकां पूजयाम्यहम्॥
कालिकां ध्यायामि। आवाहयामि॥
| नारायण्यै नमः। |
| ललनाप्रियायै नमः। |
| भद्रकाल्यै नमः। |
| बुद्धिदात्र्यै नमः। |
| लास्यप्रियायै नमः। |
| रम्भादिसेवितायै नमः। |
| सावित्र्यै नमः। |
| लोलाक्ष्यै नमः। |
| देव्यै नमः। |
समर्पणम् — कालिका
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन पञ्चमदिनप्रयुक्तकालिकासंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
६. चण्डिका — षष्ठदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
षष्ठे दिने चण्डिकासंज्ञकसप्तहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
चण्डवीर्यां चण्डमयीं चण्डमुण्डप्रभञ्जनीम्।
ब्रह्मेशविष्णुनमितां चण्डिकां पूजयाम्यहम्॥
चण्डिकां ध्यायामि। आवाहयामि॥
| परमायै नमः। |
| हैमवत्यै नमः। |
| शत्रुहन्त्र्यै नमः। |
| पावनायै नमः। |
| शिवायै नमः। |
| चण्डिकायै नमः। |
| पाशहस्तायै नमः। |
| भक्तप्रियायै नमः। |
| रक्तदन्तिकायै नमः। |
समर्पणम् — चण्डिका
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन षष्ठदिनप्रयुक्तचण्डिकासंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
७. शाम्भवी — सप्तमदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
सप्तमे दिने शाम्भवीसंज्ञकाष्टहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
सुखानन्दां सुखकरीं शान्तां सर्वनमस्कृताम्।
सर्वभूतात्मिकां देवीं शाम्भवीं पूजयाम्यहम्॥
शाम्भवीं ध्यायामि। आवाहयामि॥
| शाम्भव्यै नमः। |
| मङ्गलप्रदायै नमः। |
| हरिद्राकुङ्कुमप्रियायै नमः। |
| चन्द्रहासायै नमः। |
| युद्धप्रियायै नमः। |
| रक्तबीजनिहन्त्र्यै नमः। |
| शूलिन्यै नमः। |
| चन्द्रमुख्यै नमः। |
| रत्नाभरणभूषितायै नमः। |
समर्पणम् — शाम्भवी
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन सप्तमदिनप्रयुक्तशाम्भवीसंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
८. दुर्गा — अष्टमदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
अष्टमे दिने दुर्गासंज्ञकनवहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
दुर्गमे दुस्तरे कार्ये भयशोकविनाशिनीम्।
पूजयामि सदा भक्त्या दुर्गां दुर्गार्तिहारिणीम्॥
दुर्गां ध्यायामि। आवाहयामि॥
| वाराह्यै नमः। |
| भूतडाम्बर्यै नमः। |
| रक्ताक्ष्यै नमः। |
| भ्रामर्यै नमः। |
| खड्गाङ्गायै नमः। |
| राज्यदायिन्यै नमः। |
| प्रेतवाहिन्यै नमः। |
| खड्गहस्तायै नमः। |
| दुर्गायै नमः। |
समर्पणम् — दुर्गा
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन अष्टमदिनप्रयुक्तदुर्गासंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥
९. सुभद्रा — नवमदिनम्
आसनादि पूर्ववत्। पुष्पार्चनासु विशेषः एवम् —
नवमे दिने सुभद्रासंज्ञकदशहायनकन्यापूजां करिष्ये॥
सुन्दरीं स्वर्णवर्णाङ्गीं सुखसौभाग्यदायिनीम्।
सन्तोषजननीं देवीं सुभद्रां पूजयाम्यहम्॥
सुभद्रां ध्यायामि॥ आवाहयामि॥
| योगिन्यै नमः। |
| सर्वेश्वर्यै नमः। |
| सुभद्रायै नमः। |
| योगरूपायै नमः। |
| वीरभद्रायै नमः। |
| सर्वमङ्गलायै नमः। |
| ग्रामण्यै नमः। |
| वीरमात्रे नमः। |
| सर्वमन्त्रस्वरूपिण्यै नमः। |
समर्पणम् — सुभद्रा
अनेन शरन्नवरात्रमहोत्सवपुण्यकाले कृतेन नवमदिनप्रयुक्तसुभद्रासंज्ञककन्यापूजनेन भगवती सर्वात्मिका श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी प्रीयताम्॥