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शुक्लयजुः माध्यन्दिनसंहिता — द्वाविंशोऽध्यायः (34 मन्त्राः)

शुक्लयजुः माध्यन्दिनसंहिता — द्वाविंशोऽध्यायः

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तेजो॑ऽसि शु॒क्रम॒मृत॑मायु॒ष्पा आयु॑र्मे पाहि ।


मन्त्राः

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मन्त्रप्रथम पद
1देवस्य त्वा
2इमामगृभ्णन् रशनामृतस्य
3अभिधा असि
4स्वगा त्वा
5प्रजापतये त्वा
6अग्नये स्वाहा
7हिङ्काराय स्वाहा
8यते स्वाहा
9तत्सवितुर्वरेण्य भर्गो
10हिरण्यपाणिमूतये सवितारमुप
11देवस्य चेततो
12सुष्टुति सुमतीवृधो
13राति सत्पति
14देवस्य सवितुर्मतिमासव
15अग्नि स्तोमेन
16स हव्यवाडमर्त्य
17अग्नि दूत
18अजीजनो हि
19विभूर्मात्रा प्रभू
20काय स्वाहा
21विश्वो देवस्य
22आ ब्रह्मन्
23प्राणाय स्वाहा
24प्राच्यै दिशे
25अद्भ्य स्वाहा
26वाताय स्वाहा
27अग्नये स्वाहा
28नक्षत्रेभ्य स्वाहा
29पृथिव्यै स्वाहा
30असवे स्वाहा
31मधवे स्वाहा
32वाजाय स्वाहा
33आयुर्यज्ञेन कल्पता
34एकस्मै स्वाहा

मन्त्र 1 {#mantra-1}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 1

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्या॒मा द॑दे


मन्त्र 2 {#mantra-2}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 2

इ॒माम॑गृभ्णन् रश॒नामृ॒तस्य॒ पूर्व॒ आयु॑षि वि॒दथे॑षु क॒व्या । सा नो॑ अ॒स्मिन्त्सु॒त आ ब॑भूव ऋ॒तस्य॒ साम॑न्त्स॒रमा॒रप॑न्ती


मन्त्र 3 {#mantra-3}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 3

अ॒भि॒धा अ॑सि॒ भुव॑नमसि य॒न्ताऽसि॑ ध॒र्ता । स त्वम॒ग्निं वै॑श्वान॒रᳪ सप्र॑थसं गच्छ॒ स्वाहा॑कृतः


मन्त्र 4 {#mantra-4}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 4

स्व॒गा त्वा॑ दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ ब्रह्म॒न्नश्वं॑ भ॒न्त्स्यामि॑ दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्यासम् । तं ब॑धान दे॒वेभ्य॑: प्र॒जाप॑तये॒ तेन॑ राध्नुहि


मन्त्र 5 {#mantra-5}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 5

प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मीन्द्रा॒ग्निभ्यां॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि वा॒यवे॑ त्वा॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ विश्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि॒ सर्वे॑भ्यस्त्वा दे॒वेभ्यो॒ जुष्टं॒ प्रोक्षा॑मि । यो अर्व॑न्तं॒ जिघा॑ᳪसति॒ तम॒भ्य॒मीति॒ वरु॑णः| प॒रो मर्त॑: प॒रः श्वा


मन्त्र 6 {#mantra-6}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 6

अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहा॒ ऽपां मोदा॑य॒ स्वाहा॑ सवि॒त्रे स्वाहा॑ वा॒यवे॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॒ बृह॒स्पत॑ये॒ स्वाहा॑ मि॒त्राय॒ स्वाहा॒ वरु॑णाय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 7 {#mantra-7}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 7

हि॒ङ्का॒राय॒ स्वाहा॒ हिङ्कृ॑ताय॒ स्वाहा॒ क्रन्द॑ते॒ स्वाहा॑ ऽवक्र॒न्दाय॒ स्वाहा॒ प्रोथ॑ते॒ स्वाहा॑ प्रप्रो॒थाय॒ स्वाहा॑ ग॒न्धाय॒ स्वाहा॑ घ्रा॒ताय॒ स्वाहा॒ निवि॑ष्टाय॒ स्वाहोप॑विष्टाय॒ स्वाहा॒ सन्दि॑ताय॒ स्वाहा॒ वल्ग॑ते॒ स्वाहा ऽऽसी॑नाय॒ स्वाहा॑ शया॑नाय॒ स्वाहा॒ स्वप॑ते॒ स्वाहा॒ जाग्र॑ते॒ स्वाहा॒ कूज॑ते॒ स्वाहा॒ प्रबु॑द्धाय॒ स्वाहा॑ वि॒जृम्भ॑माणाय॒ स्वाहा॒ विचृ॑ताय॒ स्वाहा॒ सᳪहा॑नाय॒ स्वाहोप॑स्थिताय॒ स्वाहाऽऽय॑नाय॒ स्वाहा॒ प्राय॑णाय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 8 {#mantra-8}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 8

य॒ते स्वाहा॒ धाव॑ते॒ स्वाहो॑द्द्रा॒वाय॒ स्वाहोद्द्रु॑ताय॒ स्वाहा॑ शूका॒राय॒ स्वाहा॒ शूकृ॑ताय॒ स्वाहा॒ निष॑ण्णाय॒ स्वाहोत्थि॑ताय॒ स्वाहा॑ ज॒वाय॒ स्वाहा॒ बला॑य॒ स्वाहा॑ वि॒वर्त॑मानाय॒ स्वाहा॒ विवृ॑त्ताय॒ स्वाहा॑ विधून्वा॒नाय॒ स्वाहा॒ विधू॑ताय॒ स्वाहा॒ शुश्रू॑षमाणाय॒ स्वाहा॑ शृण्व॒ते स्वाहेक्ष॑माणाय॒ स्वाहे॑क्षि॒ताय॒ स्वाहा॒ वी॒क्षिताय॒ स्वाहा॑ निमे॒षाय॒ स्वाहा॒ यदत्ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यत् पिब॑ति॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ यन्मूत्रं॑ क॒रोति॒ तस्मै॒ स्वाहा॑ कुर्व॒ते स्वाहा॑ कृ॒ताय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 9 {#mantra-9}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 9

तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि । धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्


मन्त्र 10 {#mantra-10}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 10

हिर॑ण्यपाणिमू॒तये॑ सवि॒तार॒मुप॑ ह्वये । स चेत्ता॑ दे॒वता॑ प॒दम्


मन्त्र 11 {#mantra-11}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 11

दे॒वस्य॒ चेत॑तो म॒हीं प्र स॑वि॒तुर्ह॑वामहे । सु॒म॒तिᳪ स॒त्यरा॑धसम्


मन्त्र 12 {#mantra-12}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 12

सु॒ष्टु॒तिᳪ सु॑मती॒वृधो॑ रा॒तिᳪ स॑वि॒तुरी॑महे । प्र दे॒वाय॑ मती॒विदे॑


मन्त्र 13 {#mantra-13}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 13

रा॒तिᳪ सत्प॑तिं म॒हे स॑वि॒तार॒मुप॑ ह्वये । आ॒स॒वं दे॒ववी॑तये


मन्त्र 14 {#mantra-14}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 14

दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्म॒तिमा॑स॒वं वि॒श्वदे॑व्यम् । धि॒या भगं॑ मनामहे


मन्त्र 15 {#mantra-15}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 15

अ॒ग्निᳪ स्तोमे॑न बोधय समिधा॒नो अम॑र्त्यम् । ह॒व्या दे॒वेषु॑ नो दधत्


मन्त्र 16 {#mantra-16}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 16

स ह॑व्य॒वाडम॑र्त्य उ॒शिग्दू॒तश्चनो॑हितः । अ॒ग्निर्धि॒या समृ॑ण्वति


मन्त्र 17 {#mantra-17}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 17

अ॒ग्निं दू॒तं पु॒रो द॑धे हव्य॒वाह॒मुप॑ ब्रुवे । दे॒वाँ२ आ सा॑दयादि॒ह


मन्त्र 18 {#mantra-18}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 18

अजी॑जनो॒ हि प॑वमान॒ सूर्यं॑ वि॒धारे॒ शक्म॑ना॒ पय॑: । गोजी॑रया॒ रᳪह॑माण॒: पुर॑न्ध्या


मन्त्र 19 {#mantra-19}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 19

वि॒भूर्मा॒त्रा प्र॒भूः पि॒त्राऽश्वो॑ऽसि॒ हयो॒ऽस्यत्यो॑ऽसि॒ मयो॒ऽस्यर्वा॑ऽसि॒ सप्ति॑रसि वा॒ज्य॒सि॒ वृषा॑ऽसि नृ॒मणा॑ असि । ययु॒र्नामा॑ऽसि॒ शिशु॒र्नामा॑स्यादि॒त्यानां॒ पत्वाऽन्वि॑हि॒ देवा॑ आशापाला ए॒तं दे॒वेभ्योऽश्वं॒ मेधा॑य॒ प्रोक्षि॑तᳪ रक्षते॒ह रन्ति॑ रि॒ह र॑मतामि॒ह धृति॑रि॒ह स्वधृ॑ति॒: स्वाहा॑


मन्त्र 20 {#mantra-20}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 20

काय॒ स्वाहा॒ कस्मै॒ स्वाहा॑ कत॒मस्मै॒ स्वाहा॒ स्वाहा॒ऽऽधिमाधी॑ताय॒ स्वाहा॒ मन॑: प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑ चि॒त्तं विज्ञा॑ता॒यादि॑त्यै॒ स्वाहा ऽदि॑त्यै मह्यै॒ स्वाहा ऽदि॑त्यै सुमृडी॒कायै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै पाव॒कायै॒ स्वाहा॒ सर॑स्वत्यै बृहत्यै॒ स्वाहा॑ पू॒ष्णे स्वाहा॑ पू॒ष्णे प्र॑प॒थ्या॒य॒ स्वाहा॑ पू॒ष्णे न॒रन्धि॑षाय॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॑ तु॒रीपा॑य॒ स्वाहा॒ त्वष्ट्रे॑ पुरु॒रूपा॑य॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे निभूय॒पाय॒ स्वाहा॒ विष्ण॑वे शिपिवि॒ष्टाय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 21 {#mantra-21}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 21

विश्वो॑ दे॒वस्य॑ ने॒तुर्मर्तो॑ वुरीत स॒ख्यम् । विश्वो॑ रा॒य इ॑षुध्यति द्यु॒म्नं वृ॑णीत पु॒ष्यसे॒ स्वाहा॑


मन्त्र 22 {#mantra-22}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 22

आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शूर॑ इष॒व्योऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्री॑ धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्ति॒: पुर॑न्धि॒र्योषा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॑यतां॒ निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यो॑ वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ ओष॑धयः पच्यन्तां योगक्षे॒मो न॑: कल्पताम्


मन्त्र 23 {#mantra-23}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 23

प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ऽपा॒नाय॒ स्वाहा॑ व्या॒नाय॒ स्वाहा॒ चक्षु॑षे॒ स्वाहा॒ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑ वा॒चे स्वाहा॒ मन॑से॒ स्वाहा॑


मन्त्र 24 {#mantra-24}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 24

प्राच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ दक्षि॑णायै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑ प्र॒तीच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहोदी॑च्यै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहो॒र्ध्वायै॑ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा ऽवा॑च्यै दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑


मन्त्र 25 {#mantra-25}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 25

अ॒द्भ्यः स्वाहा॑ वा॒र्भ्यः स्वाहो॑द॒काय॒ स्वाहा॒ तिष्ठ॑न्तीभ्य॒: स्वाहा॒ स्रव॑न्तीभ्य॒: स्वाहा॒ स्यन्द॑मानाभ्य॒: स्वाहा॒ कूप्या॑भ्य॒: स्वाहा॒ सूद्या॑भ्य॒: स्वाहा॒ धार्या॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऽर्ण॒वाय॒ स्वाहा॑ समु॒द्राय॒ स्वाहा॑ सरि॒राय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 26 {#mantra-26}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 26

वाता॑य॒ स्वाहा॑ धू॒माय॒ स्वाहा॒ ऽभ्राय॒ स्वाहा॑ मे॒घाय॒ स्वाहा॑ वि॒द्योत॑मानाय॒ स्वाहा॑ स्त॒नय॑ते॒ स्वाहा॑ ऽव॒स्फूर्ज॑ते॒ स्वाहा॒ वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ ऽव॒वर्ष॑ते॒ स्वाहो॒ग्रं वर्ष॑ते॒ स्वाहा॑ शी॒घ्रं वर्ष॑ते॒ स्वाहो॑द्गृह्ण॒ते स्वाहोद्गृ॑हीताय॒ स्वाहा॑ प्रुष्ण॒ते स्वाहा॑ शीकाय॒ते स्वाहा॒ प्रुष्वा॑भ्य॒: स्वाहा॑ ह्रा॒दुनी॑भ्य॒: स्वाहा॑ नीहा॒राय॒ स्वाहा॑


मन्त्र 27 {#mantra-27}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 27

अ॒ग्नये॒ स्वाहा॒ सोमा॑य॒ स्वाहेन्द्रा॑य॒ स्वाहा॑ पृथिव्यै॒ स्वाहा॒ ऽन्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ दि॒वे स्वाहा॑ दि॒ग्भ्यः स्वाहा ऽऽशा॑भ्य॒: स्वाहो॒र्व्यै॒ दि॒शे स्वाहा॒ ऽर्वाच्यै॑ दि॒शे स्वाहा॑


मन्त्र 28 {#mantra-28}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 28

नक्ष॑त्रेभ्य॒: स्वाहा॑ नक्ष॒त्रिये॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऽहोरा॒त्रेभ्य॒: स्वाहा॑ ऽर्धमा॒सेभ्य॒: स्वाहा॒ मासे॑भ्य॒: स्वाहा॑ ऋ॒तुभ्य॒: स्वाहा॑ ऽऽर्त॒वेभ्य॒: स्वाहा॑ संवत्स॒राय॒ स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ र॒श्मिभ्य॒: स्वाहा॒ वसु॑भ्य॒: स्वाहा॑ रु॒द्रेभ्य॒: स्वाहा॑ ऽऽदि॒त्येभ्य॒: स्वाहा॑ म॒रुद्भ्य॒: स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्य॒: स्वाहा॒ मूले॑भ्य॒: स्वाहा॒ शाखा॑भ्य॒: स्वाहा॒ वन॒स्पति॑भ्य॒: स्वाहा॒ पुष्पे॑भ्य॒: स्वाहा॒ फले॑भ्य॒: स्वाहौष॑धीभ्य॒: स्वाहा॑


मन्त्र 29 {#mantra-29}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 29

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॒ ऽन्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ दि॒वे स्वाहा॒ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ नक्ष॑त्रेभ्य॒: स्वाहा॒ ऽद्भ्यः स्वाहौ॑षधीभ्य॒: स्वाहा॒ वन॒स्पति॑भ्य॒: स्वाहा॑ परिप्ल॒वेभ्य॒: स्वाहा॑ चराच॒रेभ्य॒: स्वाहा॑ सरीसृ॒पेभ्य॒: स्वाहा॑


मन्त्र 30 {#mantra-30}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 30

अस॑वे॒ स्वाहा॒ वस॑वे॒ स्वाहा॑ वि॒भुवे॒ स्वाहा॒ विव॑स्वते॒ स्वाहा॑ गण॒श्रिये॒ स्वाहा॑ ग॒णप॑तये॒ स्वाहा॑ ऽभि॒भुवे॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ शू॒षाय॒ स्वाहा॑ सᳪस॒र्पाय॒ स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ ज्योति॑षे॒ स्वाहा॑ मलिम्लु॒चाय॒ स्वाहा॒ दिवा॑ प॒तय॑ते॒ स्वाहा॑


मन्त्र 31 {#mantra-31}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 31

मध॑वे॒ स्वाहा॒ माध॑वाय॒ स्वाहा॑ शु॒क्राय॒ स्वाहा॒ शुच॑ये॒ स्वाहा॒ नभ॑से॒ स्वाहा॑ नभ॒स्या॒य॒ स्वाहे॒षाय॒ स्वाहो॒र्जाय॒ स्वाहा॒ सह॑से॒ स्वाहा॑ सह॒स्या॒य॒ स्वाहा॒ तप॑से॒ स्वाहा॑ तप॒स्या॒य॒ स्वाहा॑ ऽᳪहसस्प॒तये॒ स्वाहा॑


मन्त्र 32 {#mantra-32}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 32

वाजा॑य॒ स्वाहा॑ प्रस॒वाय॒ स्वाहा॑ ऽपि॒जाय॒ स्वाहा॒ क्रत॑वे॒ स्वाहा॒ स्व: स्वाहा॑ मू॒र्ध्ने स्वाहा॑ व्यश्नु॒विने॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य॒ स्वाहा ऽन्त्या॑य भौव॒नाय॒ स्वाहा॒ भुव॑नस्य॒ पत॑ये॒ स्वाहा ऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑


मन्त्र 33 {#mantra-33}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 33

आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ प्रा॒णो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ ऽपा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ व्या॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहो॑दा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ समा॒नो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ चक्षु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ श्रोत्रं॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ वाग्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ मनो॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ ऽऽत्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ ब्र॒ह्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ ज्योति॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॒ स्व॒र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ पृ॒ष्ठं य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑ य॒ज्ञो य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्वाहा॑


मन्त्र 34 {#mantra-34}

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अध्याय: 22 | मन्त्र: 34

एक॑स्मै॒ स्वाहा॒ द्वाभ्या॒ᳪ स्वाहा॑ श॒ताय॒ स्वाहैक॑शताय॒ स्वाहा॒ व्यु॒ष्ट्यै॒ स्वाहा॑ स्व॒र्गाय॒ स्वाहा॑