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मयि गृह्णाम्यग्रे |
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अपा पृष्ठमसि |
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ब्रह्म जज्ञान |
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हिरण्यगर्भ समवर्तताग्रे |
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द्रप्सश्चस्कन्द पृथिवीमनु |
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नमोऽस्तु सर्पेभ्यो |
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7 |
या इषवो |
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8 |
ये वामी |
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9 |
कृणुष्व पाज |
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तव भ्रमास |
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11 |
प्रति स्पशो |
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12 |
उदग्ने तिष्ठ |
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13 |
ऊर्ध्वो भव |
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अग्नेष्ट्वा तेजसा |
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15 |
भुवो यज्ञस्य |
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16 |
ध्रुवासि धरुणास्तृता |
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प्रजापतिष्ट्वा सादयत्वपा |
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18 |
भूरसि भूमिरस्यदितिरसि |
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19 |
विश्वस्मै प्राणायापानाय |
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20 |
काण्डात्काण्डात्प्ररोहन्ती परुष |
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21 |
या शतेन |
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22 |
यास्ते अग्ने |
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23 |
या वो |
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24 |
विराड्ज्योतिरधारयत्स्वराड्ज्योतिरधारयत् |
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25 |
विश्वस्मै प्राणायापानाय |
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26 |
मधुश्च माधवश्च |
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27 |
अषाळहासि सहमाना |
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28 |
सहस्वेमा अभिमाती |
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29 |
मधु वाता |
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30 |
मधु नक्तमुतोषसो |
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31 |
मधुमान्नो वनस्पतिर्मधुमा३ |
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32 |
अपा गम्भन्त्सीद |
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33 |
त्रीन्त्समुद्रान्त्समसृपत् स्वर्गानपा |
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34 |
मही द्यौ |
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35 |
विष्णो कर्माणि |
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36 |
ध्रुवासि धरुणेतो |
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37 |
इषे राये |
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38 |
अग्ने युक्ष्वा |
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39 |
युक्ष्वा हि |
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40 |
सम्यक् स्रवन्ति |
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41 |
ऋचे त्वा |
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42 |
अग्निर्ज्योतिषा ज्योतिष्मान् |
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43 |
आदित्य गर्भ |
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44 |
वातस्य जूति |
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45 |
अजस्रमिन्दुमरुष भुरण्युमग्निमीळे |
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46 |
वरूत्री त्वष्टुर्वरुणस्य |
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यो अग्निरग्नेरध्यजायत |
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48 |
चित्र देवानामुदगादनीक |
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49 |
इम मा |
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50 |
इम मा |
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51 |
इम साहस्र |
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52 |
इममूर्णायु वरुणस्य |
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53 |
अजो ह्यग्नेरजनिष्ट |
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54 |
त्व यविष्ठ |
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55 |
अपा त्वेमन्त्सादयाम्यपा |
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56 |
अय पुरो |
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57 |
गायत्र्यै गायत्र |
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58 |
अय दक्षिणा |
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59 |
त्रिष्टुभ स्वार |
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60 |
अय पश्चाद्विश्वव्यचास्तस्य |
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61 |
जगत्या ऋक्सममृक्समाच्छुक्र |
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62 |
इदमुत्तरात् स्वस्तस्य |
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अनुष्टुभ ऐळमैळान्मन्थी |
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इयमुपरि मतिस्तस्यै |
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पङ्क्त्यै निधनवन्निधनवत |