Prapāṭhaka 10 — Anuvāka sūcī
Prapāṭhaka 2 (chapter 10) {#chapter-10}
Section titled “Prapāṭhaka 2 (chapter 10) {#chapter-10}”| Prapāṭhaka | Anuvāka | First Words |
|---|---|---|
| 10 | 1 | १ प्रजापति |
| 10 | 1 | प्रजाकाम इद्राग्नी |
| 10 | 2 | ६ अग्नये |
| 10 | 2 | व्रतपतये निशिताया |
| 10 | 3 | ११ अग्नये |
| 10 | 3 | भ्रातृव्यस्याऽस्मिन्तेजस्वते पुरोडाशमष्टात्रिृशच्च |
| 10 | 4 | १५ अग्नयेऽन्नवते |
| 10 | 4 | करोत्यन्नादो दधाति |
| 10 | 5 | २३ वैश्वानर |
| 10 | 5 | प्रजाकाम सवथ्सर |
| 10 | 6 | ३० आदित्य |
| 10 | 6 | मृजाते निर्वरुण |
| 10 | 7 | ३५ ऐद्र |
| 10 | 7 | इद्रियावतग्ग् स्वेन |
| 10 | 8 | ४० इद्रायान्वृजवे |
| 10 | 8 | अपि तग्ग् |
| 10 | 9 | ४६ आग्नावैष्णवमेकादशकपाल |
| 10 | 9 | ब्रह्मणेवैनमभि चरति |
| 10 | 10 | ५३ असावादित्यो |
| 10 | 10 | रुद्रो भेषज |
| 10 | 11 | ५८ ऐद्रमेकादशकपाल |
| 10 | 11 | विशमेव |
| 10 | 12 | ६४ हिरण्यगर्भ |
| 10 | 12 | दधानो जिनोषि |