Prapāṭhaka 13 — Anuvāka sūcī
Prapāṭhaka 5 (chapter 13) {#chapter-13}
Section titled “Prapāṭhaka 5 (chapter 13) {#chapter-13}”| Prapāṭhaka | Anuvāka | First Words |
|---|---|---|
| 13 | 1 | १ विश्वरूपो |
| 13 | 1 | यथ्सोमपान ते |
| 13 | 2 | ८ त्वष्टा |
| 13 | 2 | अस्य मा |
| 13 | 3 | १५ इद्र |
| 13 | 3 | दधि मे |
| 13 | 4 | २२ ब्रह्मवादिनो |
| 13 | 4 | एता तदौदुबरग्ग् |
| 13 | 5 | २७ नासोमयाजी |
| 13 | 5 | चद्रमा द्वे |
| 13 | 6 | ३३ एष |
| 13 | 6 | पश्यति ताभ्यामहरैदसाव |
| 13 | 7 | ३९ देवा |
| 13 | 7 | बर्स वो |
| 13 | 8 | ४४ अयज्ञो |
| 13 | 8 | आशातावाह पचदशाब्रवीदन्वाहैतया |
| 13 | 9 | ५१ अग्ने |
| 13 | 9 | विप्रानुमदित इत्याह |
| 13 | 10 | ५७ त्रीग् |
| 13 | 10 | कामयेत प्रतिष्ठित्यै |
| 13 | 11 | ६१ निवीत |
| 13 | 11 | वा आरण्याग्श्चाव |
| 13 | 12 | ७० आयुष्ट |
| 13 | 12 | यह्वीस्समध्वराय नो |