Prapāṭhaka 21 — Anuvāka sūcī
Prapāṭhaka 2 (chapter 21) {#chapter-21}
Section titled “Prapāṭhaka 2 (chapter 21) {#chapter-21}”| Prapāṭhaka | Anuvāka | First Words |
|---|---|---|
| 21 | 1 | १ विष्णो |
| 21 | 1 | दिवमनु वि |
| 21 | 2 | ६ दिवस्परि |
| 21 | 2 | तृतीये त्वा |
| 21 | 3 | १० अन्नपतेऽन्नस्य |
| 21 | 3 | आ तवोर्जाऽनु |
| 21 | 4 | १४ अपेत |
| 21 | 4 | अस्त्वोषधीषु जानन्नष्टा |
| 21 | 5 | १८ समितृ |
| 21 | 5 | समोकसौ विश्वरूपे |
| 21 | 6 | २४ या |
| 21 | 6 | रप पतत्रिणीर्या |
| 21 | 7 | २९ मा |
| 21 | 7 | आ मन्दस्व |
| 21 | 8 | ३३ अभ्यस्थाद्विश्वा |
| 21 | 8 | महोऽनु यातुधानानामेकादश |
| 21 | 9 | ३६ ध्रुवासि |
| 21 | 9 | प्रतिष्ठायै सहस्रवीर्या |
| 21 | 10 | ४२ आदित्य |
| 21 | 10 | अग्ने मा |
| 21 | 11 | ४६ इन्द्राग्नी |
| 21 | 11 | हि वृता |